संदेश

गजब-गजब के गुल: डॉ. हरेश्वर राय

'भोजपुरी संसार' में हार्दिक स्वागत बा | भोजपुरी के बढंती खातिर ब्लॉग के जरूर follow करीं- डॉ. हरेश्वर राय Visit: www.englitmail.com

गगन बाग़ में खिल रहल बा सितारनके फूल, भुईंया ऊपर उग रहल बा जटही अउर बबूल I
माड़-भात प गरहन लागल कोंहड़ा फूल किराइल बा, कोदो सावाँ मडुआजी के दिन बहुत पतराइल बा I
गधपुरना के सामत आइल नोनी करमी गइल सुखाय, दिन फिरल गोबरछत्ता के गाजर घास बहुत अगराय I
गजब गति से पनप रहल बा बेशरम के कुल कुक्कुरमुत्ता खिला रहल बा गजब गजब के गुल I

उरुआ बन्दना: हरेश्वर राय

चित्र
'भोजपुरी संसार' में हार्दिक स्वागत बा | भोजपुरी के बढंती खातिर ब्लॉग के जरूर follow करीं- डॉ. हरेश्वर राय Visit: www.englitmail.com



सुन लीं अरजिया हमार, उलुकदेव सुन लीं अरजिया हमार I
जोड़िला हाँथवा गोड़वा परिला भजिला दाँत चिहार, उलुकदेव सुन लीं अरजिया हमार I
मोहक चोंच नयन अभिरामा रतिया के रउरा सरदार, उलुकदेव सुन लीं अरजिया हमार I
रउवे हमार साँढू रउवे हमार मउसा सरहज के रउवे भतार, उलुकदेव सुन लीं अरजिया हमार I
अबकी दिवलिया प दीं दरशनवा बोतल संगे करब इंतजार, उलुकदेव सुन लीं अरजिया हमार I
रात अढ़ाई बजे माई

आइ हो दादा: हरेश्वर राय

चित्र
'भोजपुरी संसार' में हार्दिक स्वागत बा | भोजपुरी के बढंती खातिर ब्लॉग के जरूर follow करीं- डॉ. हरेश्वर राय Visit: www.englitmail.com



सपना देखनीं भोरहरिया आइ हो दादा, मुखिया होगइल मोर मेहरिया आइ हो दादा I
हमरा दुअरा उमड़ रहल बा सउँसे गाँव जवार, लाग रहल बा देवीजी के नारा बारम्बार, डीजे बाजता दुअरिया आइ हो दादा I

ढोल नगाड़ा बाजे लागल जुलुस निकलल भारी, आगे आगे नवका मुखिया पीछे से नर नारी, बड़ुए मधदुपहरिया आइ हो दादा I
चौकठ-चौकठ घूमेलगली नवा नवा के सीस, बड़ बुढ़न से माँगत गइली

लूटीं लूट मचल बा: डॉ. हरेश्वर राय

चित्र
भोजपुरी खातिर समर्पित हमार इ ब्लॉग 'हमार भोजपुरी संसार' में रउरा सभे के हार्दिक स्वागत बा | अगर हमार प्रस्तुति रउरा सभे के अच्छा लागे त एह ब्लॉग के जरूर follow करीं | ----- डॉ. हरेश्वर राय




लूटीं लूट मचल बा सगरो लूटीं लूट मचल बा I
बाढ़ लूटीं, सूखा लूटीं राहत के लूटीं मिठाई, भूख लूटीं, पियास लूटीं लूटीं थोड़की महंगाई I
वोट लूटीं, नोट लूटीं लूटीं चकाचक नारा, रैली लूटीं, रैला लूटीं गटकीं देशी ठर्रा I
राज लूटीं, लाज लूटीं लूटीं तनिका मह्मारी, जात लूटीं, पाँत लूटीं लूटीं मौत बीमारी I
दिल्ली लूटीं, पटना लूटीं लूटीं छपरा आरा, गोर लूटीं, करिया लूटीं लूटीं दखिन दियारा I
पगड़ी, चूड़ी, साड़ी लूटीं लूटीं गुलाबी वादा, लूटीं सभे लूट मचल बा नर होखीं भा मादा I

नेह भरल पाती: डॉ. हरेश्वर राय

चित्र
भोजपुरी खातिर समर्पित हमार इ ब्लॉग 'हमार भोजपुरी संसार' में रउरा सभे के हार्दिक स्वागत बा | अगर हमार प्रस्तुति रउरा सभे के अच्छा लागे त एह ब्लॉग के जरूर follow करीं | ----- डॉ. हरेश्वर राय


नेहभरलपाती अबनाआवे।
ऊंघाअइलमाईकेलोरी गूंगभइलचैतीआहोरी।
सुखियादादीपराती अबनागावे।
दरकगइलआंगनकेछाती चूल्हाफोरिबँटाईलमाटी।
पुरनियाँकेथाती अबना

सुन्दर खेत बनाइब हम: डॉ. हरेश्वर राय

चित्र
भोजपुरी खातिर समर्पित हमार इ ब्लॉग 'हमार भोजपुरी संसार' में रउरा सभे के हार्दिक स्वागत बा | अगर हमार प्रस्तुति रउरा सभे के अच्छा लागे त एह ब्लॉग के जरूर follow करीं | ----- डॉ. हरेश्वर राय
सुन्दर खेत बनाइब हम
गमछी भर लेके आकाश सुन्दर खेत बनाइब हम, एक कटोरा तारा-बिया ले ओहमें फैलाइब हम I
बियन के अंकुरावे खातिर मुट्ठी भर बदरी ले आइब, पौधन के उपजावे खातिर दिया भर सुरुज छींटवाइबI
तारन से जब खेत भरी त नाचब कुदब गाइब हम, दूज चान के हँसुआ लेके कटवाइब बन्ह्वाइब हम I
तारा के बोझन से भरब गाँवन के खलिहान ताव देत मोंछ्न प घुमिहें देशवा के किसान I

मन उदास बा: डॉ. हरेश्वर राय

चित्र
भोजपुरी खातिर समर्पित हमार इ ब्लॉग 'हमार भोजपुरी संसार' में रउरा सभे के हार्दिक स्वागत बा | अगर हमार प्रस्तुति रउरा सभे के अच्छा लागे त एह ब्लॉग के जरूर follow करीं |
-- डॉ. हरेश्वर राय

मन उदास बा
सुक्खल नदी जस मन उदास बा I
चाँद जस आस में लागल बा गरहन, सपना के पाँखी प घाव भइल बड़हन,
डेगे डेग पसरल खाली पियास बा I
आँखी के बागी में पतझड़ के राज बा, मन के मुंडेरा प गिर रहल गाज बा,
उदासी के गरल से भरल गिलास बा I
हँसी के फूल प उगल बा शूल ख़ुशी के खेत में उगल बबूल,

आवले बोलता नयका बिहान: डॉ. हरेश्वर राय

चित्र
भोजपुरी खातिर समर्पित हमार इ ब्लॉग 'हमार भोजपुरी संसार' में रउरा सभे के हार्दिक स्वागत बा | अगर हमार प्रस्तुति रउरा सभे के अच्छा लागे त एह ब्लॉग के जरूर follow करीं | ----- डॉ. हरेश्वर राय

हर के कलम से धरती के कागज प पसीना के सियाही से जीवन उकेरे ला किसान बाकिर ओकरे घटल रहता चाउर पिसान !
ओकरे पसीना अतना सस्ता काहे बा ओकरे हालत अतना खस्ता काहे बा सवाल प सवाल पूछता किसान ?
चुप्पी टूटल बा त बुढ़िया आन्ही अइबे करी ताश के पत्ता से बनल ताज तखत उड़इबे करी आ अन्हरिया के होई सम्पुरने भसान I
उगिहें सुरुज पुरुबवाके ओर झाँकी किरिनिया अंगनवा के ओर बदलल बा मिजाज मौसम के  आवले बोलता नयका बिहान I

दीप: डॉ. हरेश्वर राय

चित्र
Visit please:www.englitmail.com

भोजपुरी खातिर समर्पित हमार इ ब्लॉग 'हमार भोजपुरी संसार' में रउरा सभे के हार्दिक स्वागत बा | अगर हमार प्रस्तुति रउरा सभे के अच्छा लागे त एह ब्लॉग के जरूर follow करीं | ----- डॉ. हरेश्वर राय



घोर अमावस के पूनम में बदल रहल बा दीप, मद में आन्हर अन्धकार के मसल रहल बा दीप I
कठिन दौर से गुजर-गुजर के निकल रहल बा दीप, गिर रहल बा, उठ रहल बा संभल रहल बा दीप I
आन्ही पानी में भी हरदम टिकल रहल बा दीप, भय, निराशा, निर्बलता के निगल रहल बा दीप I
मन में लेके आस भोर के मचल रहल बा दीप, हरेक बार अपना मिशन में सफल रहल बा दीप I

गजब-गजब के गुल: डॉ. हरेश्वर राय

चित्र
Visit my web: www.englitmail.com

भोजपुरी खातिर समर्पित हमार इ ब्लॉग 'हमार भोजपुरी संसार' में रउरा सभे के हार्दिक स्वागत बा | अगर हमार प्रस्तुति रउरा सभे के अच्छा लागे त एह ब्लॉग के जरूर follow करीं | ----- डॉ. हरेश्वर राय


गगन बाग़ में खिल रहल बा सितारनके फूल, भुईंया ऊपर उग रहल बा जटही अउर बबूल I
माड़-भात प गरहन लागल कोंहड़ा फूल किराइल बा, कोदो सावाँ मडुआजी के दिन बहुत पतराइल बा I
गधपुरना के सामत आइल नोनी करमी गइल सुखाय, दिन फिरल गोबरछत्ता के गाजर घास बहुत अगराय I
गजब गति से पनप रहल बा बेशरम के कुल कुक्कुरमुत्ता खिला रहल बा गजब गजब के गुल I